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सोना-चांदी
बोलने
ना जाने
हीं भूले जाते
करनापड़ताहैसबकोहीश्रम।देताहैपरमात्मासिर्फलकीरे
खाने
लगा था
लगा है
वादा
प्रेम-कहानी
हीरा-मोती
सिर-माथे
आँखो की गहराई
तस्लीमसुनो
नया साल
पर किताब
हिंदी शायरी ✍
शुरू
टीमवर्ककेसाथकोईभीकार्यमेंजीतहासिल
हुई थी
Hindi
क्यू लगा
Quotes
शनिवार: ना जाने क्यू लगा भूले वादा, सुनो नया साल आ चुका तो। ...
मेरी शायरी.. आँखों की गहराई देखकर सागर भी सोचने लगा, ए बंदे ...
बुधवार: सोना-चांदी या हीरा-मोती, इन सबका ऐसा हुआ नशा। चढ़ कर ...
शनिवार : इंसान मास भी खाने लगा है, निर्दोष पशु भी खाने लगा ...
शनिवार: जैसे ही मेरी प्रेम-कहानी शुरू हुई थी, मोहब्बत पर कि ...
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